सुरक्षा व्यवस्था ध्वस्त, श्रद्धालुओं में दहशत, प्रशासनिक दावों की खुली पोल
संचार क्रांति – संवाददाता, बांसी (सिद्धार्थनगर)।
63 वर्षों से चली आ रही बांसी माघ मेले की सुव्यवस्थित परंपरा सोमवार शाम 9 फरवरी को उस समय अव्यवस्था का शिकार हो गई, जब राप्ती नदी के प्रमुख घाट पर मारपीट की घटना सामने आई। मौनी अमावस्या स्नान से शुरू होकर एक माह तक चलने वाले इस विशाल धार्मिक मेले में सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह विफल नजर आई, जिससे प्रशासनिक तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों एवं वायरल वीडियो फुटेज के अनुसार, राप्ती घाट पर मौजूद 5 से 6 युवकों ने एक युवक को घेरकर बेरहमी से पीटा। लात-घूंसे और थप्पड़ों से की गई मारपीट के दौरान घाट पर अफरा-तफरी मच गई। अचानक हुई इस घटना से मेले में स्नान और दर्शन के लिए आई महिलाएं व बच्चियां घबरा गईं और सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगीं। कुछ ही क्षणों में घाट पर भय का माहौल बन गया, जिसके चलते कई श्रद्धालुओं को स्नान व दर्शन अधूरे छोड़ने पड़े।
सबसे चिंताजनक पहलू यह रहा कि घटना के दौरान और उसके बाद भी मौके पर कोई सुरक्षाकर्मी मौजूद नहीं था। जबकि हर वर्ष भारी भीड़ और धार्मिक संवेदनशीलता को देखते हुए घाटों पर अस्थायी पुलिस चौकी, गोताखोर और सुरक्षा बलों की तैनाती के दावे किए जाते हैं। इस घटना ने इन तमाम दावों की पोल खोलकर रख दी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब इतने बड़े और ऐतिहासिक धार्मिक मेले में प्रमुख घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था ही नदारद होगी, तो श्रद्धालुओं की जान-माल की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जा सकती है। लोगों ने प्रशासन से तत्काल सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।
गौरतलब है कि बांसी माघ मेले का उद्घाटन 17 जनवरी 2026 को हुआ था और यह मेला पूरे एक माह तक चलता है। मेले के शुरुआती दिनों में ही इस तरह की गंभीर घटना का सामने आना प्रशासनिक लापरवाही की ओर साफ इशारा करता है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस घटना से सबक लेकर सुरक्षा व्यवस्था को कितनी तत्परता से दुरुस्त करता है या फिर श्रद्धालु ऐसे ही असुरक्षा के माहौल में मेले में आने को मजबूर होंगे।



