संचारक्रान्ति | संवादसूत्र – क्षेत्र में बसंत पंचमी का पावन पर्व इस वर्ष भी अत्यंत श्रद्धा, आस्था और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। विद्या, बुद्धि और विवेक की अधिष्ठात्री देवी माँ सरस्वती के पूजन हेतु विद्यालयों में विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस अवसर पर शिक्षा के साथ-साथ संस्कार, अनुशासन और सांस्कृतिक मूल्यों को आत्मसात करने का संदेश दिया गया।
क्षेत्र के गोस्वामी तुलसीदास उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, डंडवाघाट, जय माँ सीता शक्ति जूनियर हाई स्कूल सिंघिया, प्राथमिक विद्यालय विशुनपुर, संस्कार शिक्षा निकेतन अतरमू , स्वामी विवेकानंद विद्यालय बरगदवा सहित क्षेत्र के समस्त विद्यालयों में प्रातः काल से ही धार्मिक अनुष्ठानों का क्रम आरंभ हो गया। विद्यालय परिसरों को पीले पुष्पों, पताकाओं, गुब्बारों एवं रंगोली से भव्य रूप से सजाया गया, जिससे वातावरण पूर्णतः भक्तिमय हो उठा।
विद्यालयों में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच माँ सरस्वती की प्रतिमा एवं चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की गई। शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं विद्यालय कर्मियों ने सामूहिक रूप से माँ सरस्वती की वंदना कर विद्या, सद्बुद्धि और सफलता की कामना की। कई विद्यालयों में हवन-पूजन का आयोजन भी किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर सहभागिता निभाई।
पूजन उपरांत आयोजित संगोष्ठियों में विद्यालय प्रबंधकों एवं शिक्षकों ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि बसंत पंचमी केवल एक पर्व नहीं, बल्कि ज्ञान, सृजनशीलता और सकारात्मक सोच का प्रतीक है। माँ सरस्वती की आराधना से मनुष्य के जीवन में अज्ञान का अंधकार दूर होता है और ज्ञान का प्रकाश फैलता है। उन्होंने विद्यार्थियों से नियमित अध्ययन, अनुशासन एवं नैतिक मूल्यों को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों द्वारा सरस्वती वंदना, देशभक्ति गीत, कविता पाठ एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दी गईं, जिन्हें उपस्थित अभिभावकों एवं शिक्षकों ने सराहा। छोटे बच्चों में भी विशेष उत्साह देखने को मिला, जिन्होंने पारंपरिक परिधान में कार्यक्रमों में भाग लेकर पर्व की शोभा बढ़ाई।
अंत में प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया। विद्यालय परिवार द्वारा समाज, क्षेत्र एवं राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई। बसंत पंचमी के इस आयोजन ने न केवल विद्यालय परिसरों को धार्मिक और सांस्कृतिक ऊर्जा से भर दिया, बल्कि विद्यार्थियों के मन में शिक्षा के प्रति नई प्रेरणा और उत्साह का संचार भी किया।
कुल मिलाकर, बसंत पंचमी के अवसर पर आयोजित इन कार्यक्रमों ने यह संदेश दिया कि शिक्षा के साथ-साथ संस्कार और संस्कृति का संरक्षण ही समाज के समग्र विकास का आधार है।






