संचार क्रांति संवाददाता बांसी/सिद्धार्थनगर।
बहुजन समाज पार्टी के पूर्व जिला महासचिव शमीम अहमद ने केंद्र सरकार से समाज में नफरत और वैमनस्य फैलाने वाली जाति सूचक फिल्मों पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि हाल के समय में कुछ फिल्मों के माध्यम से एक विशेष वर्ग को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है, जिससे सामाजिक सौहार्द को गंभीर क्षति पहुंच रही है।
शमीम अहमद ने कहा कि फिल्मों के जरिए किसी जाति विशेष को अपमानजनक शब्दों से संबोधित करना न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि यह देश की एकता और भाईचारे के लिए भी खतरनाक है। उन्होंने कहा कि ऐसी मानसिकता को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने बहुजन समाज पार्टी की पूर्ववर्ती सरकारों का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में चार बार बसपा की सरकार के दौरान बहन कु. मायावती ने सभी समाजों को साथ लेकर चलने का कार्य किया। उस दौर में ब्राह्मण समाज सहित सर्व समाज को सम्मान और प्रतिनिधित्व मिला, जिससे सामाजिक संतुलन बना रहा।
शमीम अहमद ने आरोप लगाया कि वर्तमान भाजपा सरकार के कार्यकाल में दलित, पिछड़े, अल्पसंख्यक समाज के साथ-साथ ब्राह्मण समाज को भी लगातार उपेक्षा और अपमान का सामना करना पड़ रहा है। देश और प्रदेश में घट रही घटनाएं सामाजिक ताने-बाने को कमजोर कर रही हैं।
उन्होंने बताया कि बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री बहन कुमारी मायावती ने भी इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से चिंता जताई है। उनके अनुसार, फिल्मों और अन्य माध्यमों से पंडित समाज को ‘घुसपैठिया’ जैसे शब्दों से संबोधित किया जाना बेहद निंदनीय है।
शमीम अहमद ने कहा कि इस तरह की घटनाओं से ब्राह्मण समाज में गहरा आक्रोश है। बहुजन समाज पार्टी ऐसी विभाजनकारी सोच का पुरजोर विरोध करती है और केंद्र सरकार से मांग करती है कि समाज को बांटने वाली और जाति विशेष को ठेस पहुंचाने वाली फिल्मों पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगाया जाए।



