संचारक्रान्ति संवाददाता, बांसी (सिद्धार्थनगर)।
तहसील व ब्लॉक क्षेत्र अंतर्गत ग्राम महुआ खुर्द में आयोजित रामलीला मंचन के छठे दिन लंका प्रसंग का सजीव एवं प्रभावशाली मंचन किया गया। इस दौरान श्रीराम के दूत अंगद द्वारा लंका में पांव जमाने तथा रावण को चुनौती देने का दृश्य दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।
मंचन के क्रम में जब अंगद लंका पहुंचकर रावण के दरबार में अपना पांव जमाते हुए उसे हटाने की चुनौती देते हैं, तो पूरा पंडाल जयकारों से गूंज उठा। अंगद के दृढ़ संकल्प, निर्भीक संवाद और आत्मविश्वास ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि अधर्म के सामने धर्म कभी पराजित नहीं होता। रावण द्वारा अंगद के पांव को हटाने का प्रयास असफल रहने का दृश्य अत्यंत रोमांचक रहा, जिसने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
लंका प्रसंग के दौरान रावण–मंदोदरी संवाद, रावण–विभीषण संवाद तथा अंगद–रावण संवाद का भी सशक्त और प्रभावपूर्ण मंचन किया गया। मंदोदरी द्वारा रावण को अहंकार त्यागने की सीख, विभीषण द्वारा धर्म के मार्ग पर चलने का उपदेश और अंगद द्वारा श्रीराम की अपार शक्ति का बोध कराने वाले संवादों ने दर्शकों को कथा के मूल भाव से जोड़ दिया। कलाकारों के सशक्त अभिनय, सटीक संवाद अदायगी और प्रभावी मंच सज्जा ने प्रस्तुति को जीवंत बना दिया।
रामलीला समिति द्वारा की गई व्यवस्थाएं प्रशंसनीय रहीं। मंच, प्रकाश व्यवस्था एवं ध्वनि संयोजन ने मंचन की गुणवत्ता को और अधिक प्रभावशाली बनाया। कार्यक्रम को देखने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीणजन, श्रद्धालु, महिलाएं एवं बच्चे उपस्थित रहे और पूरे उत्साह के साथ रामलीला का आनंद लिया।
रामलीला के छठे दिन के इस मंचन के माध्यम से यह संदेश स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आया कि अहंकार का अंत निश्चित है और सत्य व धर्म की विजय अवश्य होती है। आगामी दिनों में होने वाले युद्ध प्रसंग तथा राम–रावण संग्राम को लेकर दर्शकों में विशेष उत्सुकता देखी जा रही है।



